अदभुत आस्था
जय राम , जय राम ,जय श्री राम (एक शाम राम मंदिर और सरयू तट पर।) अयोध्या मेरी मातृभूमि है ,मेरे माता-पिता की जन्म भूमि, मेरी ससुराल,मेरे बड़े भाई की ससुराल और उसके साथ ही साथ मेरे पूरे परिवार की जड़ों को समेटने वाली भूमि है अयोध्या । बचपन से ही इससे नाता रहा है और हो भी क्यों न ! हर वर्ष गर्मी की छुट्टियों में हम लोग यहीं आते थे घूमने के लिए और तब से कान में बराबर राम जन्मभूमि और उससे संबंधित विवाद (जो राजनीतिक भाषा में विवाद थे लेकिन अयोध्या में रहने वाले लोगों के लिए पीड़ा उत्पन्न करने वाली स्थिति ) कानों में पड़ते थे । "भगवान राम के सर पर छत नहीं है" यह सब बातें मैं सुनती थी और मन में गुनती थी । कालांतर में बाबरी मस्जिद टूटी , घटनाक्रम बना ,मुकदमा जीते। जिस दिन मुकदमा जीते उस दिन अनायास आंखों से आंसुओं की बारिश होने लगी थी। फिर एक दिन शिलान्यास हुआ । रामलला की मूर्ति प्रतिष्ठित हुई और सदियों के बाद वह क्षण उपस्थित हुआ जो हर सनातन धर्मी के दिल की गहराइयों में बस गया । भव्य राम मंदिर का निर्माण! जब से राम मंदिर का निर्माण हुआ तब से बराबर कई बार देखने का कार्...