इसलिए औरतों का कमाना जरूरी है:::::
इसलिए औरतों का कमाना जरूरी है::::::
मित्रों !
यह सच है कि अध्ययन का लक्ष्य नौकरी करना मात्र नहीं होता है ।शिक्षा अनंत है ,शिक्षा का उद्देश्य अनंत है लेकिन बीते दिनों की एक घटना ने मुझे अंदर तक झकझोर दिया ।खुद पर गर्व और संतोष भी अनुभव हुआ कि मैं वर्किंग हूँ और यह मानने के लिए मन बाध्य हो गया कि महिलाओं की शिक्षा का संबंध उनके अपने धनोपाजर्न से भी जुड़ा हुआ है और उनका नौकरी करना भी आवश्यक है ।
मुझे याद आता है अपना समय ।मेरी मां प्रारंभ से ही एक गृहणी रही हैं। मेरी दोनों भाभियां भी वर्किंग नहीं हैं ।मेरे बहुत अच्छे और ऊंचे पदों पर आसीन मित्रों की पत्नियां भी वर्किंग नहीं हैं लेकिन मैंने इन सभी महिलाओं को अपने हिसाब से खर्च करते देखा है ,अपने हिसाब से घर चलाते देखा है और पूरे स्वाभिमान और सम्मान के साथ अपनी जिंदगी बिताते हुए देखा है इसलिए एक ही नियम सभी पर लागू नहीं हो सकता है। आज भी बहुत सी महिलाएं बिना वर्किंग हुए या बिना कमाए हुए ही अपना जीवन स्वाभिमान के साथ जी रही हैं लेकिन अगर समाज में एक प्रतिशत घटना भी इस तरह की घटती है तो हम सोचने पर अवश्य मजबूर हो जाते हैं कि महिलाओं की आजीविका भी जरूरी है।
इस बात की पृष्ठभूमि में वर्तमान में आई हुई “मिसेज” मूवी को भी देखा जा सकता है हालांकि मैंने अभी तक यह फिल्म नहीं देखी है लेकिन मेरा संस्मरण बिल्कुल अलग तरह का है और यह मैं इसलिए लिख रही हूं ताकि हमारी बच्चियां यह समझ सकें कि पढ़ना बहुत आवश्यक है और पढ़ने के साथ-साथ अपने पैरों पर खड़ा होना भी आवश्यक है।
पढ़ाई लिखाई का उद्देश्य एक अच्छा आई ए एस अफसर, एक अच्छा डॉक्टर ,एक अच्छा इंजीनियर और एक अच्छा प्रोफेसर बनना होना चाहिए न कि आई ए एस , डॉक्टर ,प्रोफेसर और इंजीनियर की पत्नी होना। बात आपको थोड़ा चुभ सकती है लेकिन सच्चाई यही है कि लड़कियों को यह समझना होगा कि वह खुद में क्या हैं? और शायद यही अनिवार्य बात है।
बिना अधिक भूमिका बनाए मैं आपको ले चलती हूं बीते दिनों की घटना की ओर ।मैं “खजाना मार्केट” कुछ सामान खरीदने गई । मैं सौंदर्य प्रसाधनों का इस्तेमाल नहीं करती हूं लेकिन कुछ जरूरी चीज हम सभी इस्तेमाल करते ही हैं इसलिए मैंने अपने लिए दो लिपस्टिक एक फाउंडेशन एक दो क्रीम और बिंदी के दो पत्ते लिए क्योंकि बचपन से ही सुना था कि खाने की चीज और मेकअप का सामान गुणवत्ता में अच्छा होना चाहिए भले ही कीमती हो क्योंकि उनका सीधा संबंध हमारे शरीर से है ।
मेरा कुल बिल करीब तीन हजार रुपए का बना। मैंने स्कैन किया और निकलने लगी ,तब तक वहां पर एक बड़ी सी गाड़ी आकर रुकी नीली बत्ती वाली या शायद लाल बत्ती यह मैं गौर नहीं कर पाई ।उसमें से गनर के साथ एक सूटेड बूटेड व्यक्ति जो प्रशासनिक अधिकारी थे उतरे ।उनके साथ उनकी पत्नी भी थीं । दोनों की ही उम्र पचपन छप्पन के आसपास थी।
मेरे साथ उन्होंने भी कुछ सामान पसंद किया उन्हें भी लिपस्टिक का एक शेड पसंद आ गया और सारी पेमेंट के बाद उन्होंने उसे भी आगे बढ़ा दिया। तब तक साथ खड़े हुए पति ने (जिसकी महीने की आमदनी चार या पांच लाख रुपए से कम नहीं रही होगी )उन्हें घूरकर देखा और कहा “तुम्हारा तो पेट ही नहीं भरता इन चीजों से ,जब कमाओ तब जानो कि पैसे की कीमत क्या होती है” मैं शायद इस बात पर इतना गौर न करती क्योंकि यह पति-पत्नी की व्यक्तिगत बात थी लेकिन इतने सारे लोगों के बीच में यह बात सुनकर उस महिला का चेहरा उतर गया और वो पति के साथ-साथ आगे बढ़ गईं फिर अचानक से मेरे पास पीछे मुड़कर आईं और बोलीं “ बेटा यह तुम्हारे कंधे पर जो पर्स टंगी है न वो बड़े काम की है। कम से कम तुम्हें चार लोगों के सामने किसी की बातें तो नहीं सुननी पड़ती हैं। कमा रही हो और अपने हिसाब से खर्च कर रही हो।” उन्हें पता था कि मैं वर्किंग हूं क्योंकि उनके आने के समय मैं दुकान वाली भाभी से मजाक में कह रही थी कि
“आज की दिहाड़ी पूरी करके आई हूं “
हमने एक दूसरे से आंखों ही आंखों में ढेर सारी बातें की और वह चली गईं जाते जाते मेरे सामने एक बहुत बड़ा प्रश्न छोड़ गईं कि “हां ! खुद का कमाना भी जरुरी है “इसलिए मैं अपनी कक्षा की और दुनिया की सभी लड़कियों से एक ही बात कहना चाहती हूं कि “बेटियों !खुद में सक्षम बनो और अपने पैरों की जमीन मजबूत बनाओ। किसी सक्षम व्यक्ति की पत्नी बनने की बजाय खुद सक्षम बनने का प्रयास करो क्योंकि शादी कोई विकल्प नहीं है ।अपने रास्ते खुद चुनो ।
किसी के सामने कभी झुकना न पड़े
“इसलिए औरतों का कमाना जरुरी है”
सुरभि
मौलिक
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