सोशल मीडिया में फैलता ज़हर

सुनने में  बड़ा अजीब सा लगता है लेकिन सोशल मीडिया आज जहर फैलाने का माध्यम बन गया है। वह जहर जो हमारी जड़ों को खोखला कर रहा है और उन्हें विषाक्त बना रहा है।
इसे रोका जाना बहुत आवश्यक है अन्यथा हमारी आगामी पीढ़ी  पूरी तरह से दूषित मानसिकता में जीने के लिए विवश हो जाएगी  क्योंकि उनके पास कोई भी आदर्श नहीं शेष रह जाएंगे।
 कुछ  गिने-चुने तथाकथित प्रगतिशील  युवा  भारतीय संस्कृति को दूषित करने का काम कर रहे हैं। वे समाज को न जाने किस दिशा में ले जा रहे हैं। एक ऐसी दिशा जो अंतहीन है, जिसका कोई लक्ष्य नहीं है और जो  स्वयं विनाशगामी है।
वह  भारत जिसे विश्व गुरु कहा गया है  जिसे सभ्यता और ज्ञान का प्रतीक माना गया है वह  अपनी संस्कृति को धीरे-धीरे कहीं खो न दे ।इस पर चिंतन करना बेहद आवश्यक है विषय चाहे जितनी बार  कहा  और सुना जा चुका हो लेकिन आज इस पर विचार करना बहुत आवश्यक है ।
जितना अधिक इस पर लिखा जाएगा जितनी अधिक इस पर  बात करेंगे उतना ही अधिक लोग जागरूक होंगे इसलिए हमारा और आपका कर्तव्य है कि इस विषय में जितना अधिक लोगों को जागरुक कर पाएं  जागरूक करें विशेषकर अपने घर के बच्चों और अपनी युवा पीढ़ी को उस विषय में बताएं कि उनके लिए क्या सही है और क्या गलत है।
सोशल मीडिया जो कभी  चेतना तथा जागरूकता का केंद्र हुआ करता था वह इस समय  पूरी तरह से समाज में जहर फैलाने का कार्य कर रहा है।
 बिना नाम लिए ही कहूंगी कि  बीते दिनों "यू ट्यूब  पॉडकास्ट" में जिस तरह से पारिवारिक रिश्तों और उनकी मर्यादा को खंडित करने का प्रयास किया गया वह न  केवल निंदनीय है बल्कि उस पर गंभीर विचार करने की आवश्यकता है ।
यदि  इन चीजों पर रोक नहीं लगाई गई तो एक दिन  हमारी आगामी पीढ़ी इन्हीं को अपना आदर्श मान लेगी। एक वह समय था जब हम भगवान राम ,नेताजी सुभाष चंद्र बोस ,गौतम बुद्ध और स्वामी विवेकानंद  को अपना आदर्श मानते थे  लेकिन आज ये आदर्श बच्चों से धीरे धीरे दूर हो रहे हैं।
इस विषय पर  जागरूकता लाना जरूरी है  अन्यथा हमारे  बच्चे मजाक और अश्लीलता में अंतर करना भूल जाएंगे। उन्हें लगेगा  कि शायद मॉडर्न होने की पहचान मर्यादा को छिन्न-भिन्न करने से ही बनेगी और वे उसे तार तार करने में भी नहीं चूकेंगे  ।
 संभवत हमें इस स्थिति की  गंभीरता का अंदाजा नहीं है। सरकार एवं प्रशासन को सोशल मीडिया पर बढ़ते हुए इस तरह के कार्यक्रमों को रोकना बहुत आवश्यक है।
सुरभि

Comments

  1. चिंतन करें समस्या विकराल है।

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