लड़कियां गणित नहीं पढ़ती हैं::::::::?

लड़कियां गणित नहीं पढ़ती हैं। 
          (संस्मरण)

आज दोपहर में मन बहुत भावुक हो गया ।हम सब लोग अपनी क्लासेस से फ्री होकर बैठे बात कर रहे थे तो अपने अपने बचपन के उन क्षणों  पर भी चर्चा कर रहे थे जिन्होंने हमारे मन  को बहुत प्रभावित किया ।
हम तीन लोगों ने तीन तरह की बातें कहीं।
वो मैं आपसे भी शेयर करना चाहूंगी। हमारे साथ के दो बेहद कुशाग्र बुद्धि के साइंस टीचर्स अपने-अपने अनुभव साझा कर रहे थे 
एक ने कहा कि जब वह ग्यारहनवीं  क्लास में आए तो उन्होंने बायोलोजी पढ़ने की इच्छा जाहिर की। साधारण पृष्ठभूमि के होने के कारण बहुत अधिक सपोर्ट नहीं था। जब पहले दिन वह क्लास में गए तो उनके शिक्षक ने उनसे पूछा "तुम्हारे पिता तुम्हें डॉक्टरी पढ़ा पाएंगे ? "
इस बात ने उनका मनोबल इतना तोड़ दिया कि अगले दिन से वह दूसरी क्लास में बैठने लग गए और साइंस की दूसरी शाखा से उन्होंने अपनी पढ़ाई पूरी की ।
मुझे नहीं लगता कि एक शिक्षक को इस तरह की बात किसी बच्चे से कहनी चाहिए थी। यह एक ऐसी बात थी जिसने उनके मन को बहुत अधिक प्रभावित किया था और उन्होंने बायोलॉजी ही छोड़ दी।
दूसरा संस्मरण मेरा अपना ही है ।मैं जब  पांचवी कक्षा में आई तो अचानक से मेरी लंबाई बढ़ गई परिणाम यह हुआ कि  यूनिफॉर्म (स्कर्ट) थोड़ी छोटी हो गई लेकिन इतनी भी छोटी नहीं थी कि खराब लगती और यह नवंबर दिसंबर का समय था दो तीन चार माह बाद वैसे भी यूनिफॉर्म बदलनी थी क्योंकि छठी कक्षा से हम लोगों की यूनिफॉर्म गुलाबी रंग की थी  और मुझे आगे भी उसी स्कूल में पढ़ना था।इसलिए नई यूनिफॉर्म नहीं खरीदी गई। उस दिन मैं अपनी क्लास से उछलती कूदती बाहर निकली तो न जाने मुझसे  किस बात पर नाराज मेरी अध्यापिका बहुत जोर से सब बच्चों के सामने मेरे ऊपर गरज उठीं " नई यूनिफॉर्म नहीं बनवा सकती हो"? आज भी मुझे घटना याद है ।मेरी आंखें नम हो गईं फिर टप टप  आंसू बहने लगे ।मैंने घर में  किसी से कुछ नहीं कहा।
 मां के सामने बैठकर  खाना खाते समय कटोरी में मेरे आंसू गिरे जा रहे थे।  मैंने खाना छोड़ दिया था लेकिन यह बात मुझे बहुत  इतनी अधिक चुभी थी कि आज मैं खुद टीचर हूं तो इस बात का ध्यान रखती हूं कि अपने बच्चों को किसी भी रूप में ह्यूमिलेट या अपमानित न करूं।
 तीसरी घटना बहुत ही मार्मिक है। हमारे यहां की साइंस टीचर बताने लगीं  कि जब वह नवीं कक्षा में आईं तो विद्यालय का नियम  था कि लड़कियां "होम साइंस" पढ़ेंगी  और लड़के गणित क्योंकि लड़कियां गणित नहीं पढ़ सकतीं ,इसलिए उन्हें गणित नहीं दी गई। उन्होंने उसके लिए बहुत संघर्ष किया और फिर बड़ी मुश्किल से उन्होंने गणित ली और जब पहली बार गणित की कक्षा में  गईं तो उनके अध्यापक उनका मजाक उड़ाते हुए बोले "हम लड़कियों को गणित नहीं पढ़ाते "
सारे लड़के ठहाका  लगाकर हंस पड़े ।उन्होंने बताया उस  उन्हें बहुत अधिक बुरा लगा लेकिन उस बात को उन्होंने अपनी मजबूती बना लिया और मित्रों !आज मेरी वह मित्र वाकई में न केवल गणित बल्कि साइंस की बहुत ही अच्छी अध्यापिका हैं और बच्चों की सभी समस्याओं का निवारण करती हैं लेकिन बात करते-करते वह भी बहुत भावुक हो गईं।
कहने का मतलब सिर्फ यह है यदि हम शिक्षक हैं तो हमें हमेशा इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि जो भी बोल रहे हैं वह हमारे बच्चों के मन को बहुत गहराई तक प्रभावित करते हैं।सोच समझकर बोलें।
डॉ सुरभि सिंह
(मौलिक)

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